ताजा खबर : दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर हुआ राष्ट्र को समर्पित * स्पैम टेलीमार्केटर्स पर टीआरएआई की सख्ती बढ़ी, बीते साल सात लाख से अधिक नोटिस, 5.6 लाख प्रतिबंध * मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-3' का हुआ सफल परीक्षण

भारत में एक खामोश विस्फोट हो रहा है। भीतर, मानसिक, मन के अंदर। ऊपर से सब सामान्य दिखता है। कॉलेज भरे हुए हैं। ऑफिस चल रहे हैं। सोशल मीडिया पर मुस्कानें चमक रही हैं। लेकिन, अंदर अजीब सी बेचैनी है। घबराहट है। नींद गायब है और संवाद लगातार खत्म हो रहा है। मानसिक स्वास्थ्य अब निजी समस्या नहीं बल्कि यह एक राष्ट्रीय संकट है...

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पीएन ओक ने अपनी पुस्तक 'ताज महल : द ट्रू स्टोरी' में दावा किया था कि यह स्मारक दरअसल एक प्राचीन शिव मंदिर 'तेजो महालय' है। इतिहासकारों ने अब तक इसे खारिज ही किया है। अदालतों ने भी इसे प्रमाणित इतिहास के विपरीत बताया। लेकिन, इसी विवाद को संभवतः पहली बार सिनेमाई पर्दे पर रचा गया है।

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दुनिया में जलवायु सम्मेलनों की धूम मची हुई है। विद्यार्थी निबंध लिख रहे हैं। मंच सजे हैं। संकल्प पढ़े जा रहे हैं। तालियां बज रही हैं। लेकिन, धरती तप रही है। हवा में जहर घुल रहा है। मौसम का मिज़ाज बिगड़ चुका है...

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सेवा के काम में शोर नहीं, असर होना चाहिए। लेकिन, आज के समय में असर से पहले पोस्ट आ जाती है। गौर से देखें, समाजसेवा भी कुछ-कुछ क्रिकेट मैच जैसी हो गई है। सबकी नज़र स्कोरबोर्ड पर है; किसने सबसे पहले ट्वीट किया? किसने फेसबुक पर ‘ब्रेकिंग’ डाली? किसने फोटो के साथ लिखा; “मेरे प्रयासों से…”

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कभी एक 'चाणक्य' ने एक 'चंद्रगुप्त' को बनाया था। क्या हो जब आज के दिन कोई शिक्षक उन्हीं पदचिह्नों पर चलते हुए ढेर सारे 'चंद्रगुप्त' बना दे! और, क्या होगा जब ये सभी 'चंद्रगुप्त' एक साथ मिलकर पूरे तंत्र को अपने हिसाब से चलाने में सक्षम बन जाएं। और, इसके बाद, यदि इनमें से एक 'चंद्रगुप्त' विद्रोह कर अपने ही 'चाणक्य' के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो...! यह पूरा ताना-बाना बुना गया है प्रकाश झा की नई वेब सीरीज 'संकल्प' में...।

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एक व्यस्त चौराहा। लाल बत्ती जलती है। इंजन रुकते हैं। एसी की ठंडी हवा के भीतर बैठे लोग मोबाइल देखने लगते हैं। और तभी हीरा आ जाती है। चमकीली साड़ी। सलीके से बंधे बाल। होंठों पर गाढ़ी लिपस्टिक। आंखों में तेज। उम्र कम, हौसला बड़ा। वह अपनी खास, पहचानी हुई ताली बजाती है। शीशे पर हल्की दस्तक देती है। मुस्कराकर कहती है, “खुश रहो बाबू… तरक्की करो…”।

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जब एक आम आदमी किसी मुसीबत में थाने की ओर बढ़ता है, तो क्या उसके कदमों में भरोसा होता है या दिल में खौफ़? यही सवाल आज लोकतंत्र के आईने में पुलिस की छवि को देखता हुआ खड़ा है...

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में एक बुनियादी सच्चाई को दोहराया है, “भारत की तक़दीर उसकी अपनी अंदरूनी ताक़त से तय होगी, दूसरों की मेहरबानी या गलतियों से नहीं। आज की बदलती दुनिया में, उन्होंने एक आत्मनिर्भर भारत पर ज़ोर दिया है, एक ऐसा भारत जो हिंद महासागर को सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए एक ज़रूरी हिस्सा मानता है।"

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कल्पना नहीं, हक़ीक़त देखिए। एक ही गली के मोड़ पर दो बच्चे खड़े हैं। उम्र बराबर, सपने बराबर। फर्क बस इतना है कि एक चमचमाते प्राइवेट स्कूल से निकलता है, स्मार्ट बोर्ड की रोशनी आंखों में, एसी की ठंडक…

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Kerala, that eternal communist cocoon where the lotus was once laughed off as a tropical weed, is now buzzing in BJP war rooms like a Diwali firecracker factory. Amit Shah's recent thunderclap…

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Scientists have discovered a simple yet effective method for detecting toxic molecules at incredibly low concentrations by exploiting the same phenomenon that causes coffee stains.

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